abhimanyu-1

Respected Brother
Sadar Charan Sparsh

I don’t know if I should have included this first episode of my story here.. I do not know if this will ever be told in print.. it would definitely exist on the nect.. and what better place than your blog to intiate such an act.. I am afrain Carla, Renate, Rose, Rochelle and several others that I have chosen to pen it in Hindi..

अभिमन्यु सरकार की कहानी यूं तो कई बरसों पुरानी हो गई है । यही कोई लगभग पचास एक साल पुरानी बात होगी जब हमारे मुख्य पात्र ने इस धरती पर पहली बार सांस ली होगी, आज वही कहानी तुम लोगो को अपनी जुबानी सुनाने का एक प्रयास भर कर रहा हूं ।

अभी कुछ ही दिनों पहले जब अभिमन्यु से मेरी एक अंतरंग मुलाकात हुई उसने कहा था मेरी कहानी में कहीं भी तो कुछ भी ऎसा नही है जो किसी को सुनाने लायक हो फिर भी उसने मुझे रोका नही था, बस यह कह कर टाल दिया था कि अगर तुम्हें लगता है कि इसमें किसी को दिलचस्पी होगी तो मै वही करूं जो मुझे ठीक लगे।

बस, फिर क्या था, अभि की ज़िंदगी के उतार चढ़ाव, उसके रहने-सहने के ढंग, उसका चाल-चलन, यहां तक कि उसके उठने-बैठने से लेकर उसकी हर बात मेरे दिमाग में घूम रही है, मुझे उकसा रही है कि उसकी कहानी मै आप सब तक पहुंचानें में अब और देर न करूं ।

यह किसी ऎसे व्यक्ति की कहानी नही जो आप सब मंत्र-मुग्ध होकर सुनते रहें, यह वैसी कहानी भी नही कि कोई व्यक्ति इससे प्रेरित होकर कोई फिल्म बना सके ।फिर भी अभिमन्यु की दास्तान हमारे मन को छू सकती है, अभि हमारे दिल के ही किसी कोने मे हमें छुपा बैठा मिल सकता है । हो सकता है कुछ लोग समझे कि यह उनकी अपनी ही कहानी तो नही, कुछेक मित्रगण यह भी सोच सकते है कि कहीं यह मेरी आत्म-गाथा या मेरे अपने जीवन की कहानी तो नही । मै इन प्रश्नों का उत्तर दिये बिना आगे बढ रहा हूं । अगर यह कहानी कहानी न लगकर कोई किस्सा-वाकया नज़र आये तो यह मेरी जीत होगी । हर कहानीकार यही चाहता है कि उसकी कहानी, कहानी से अधिक वास्तविकता के धरातल पर खरी उतरे, उसके पात्र मात्र पात्र न होकर समाज में व्याप्त किरदार प्रतीत हों । अगर ऎसा संभव हुआ तो यह मेरी दूसरी जीत होगी ।

अभिमन्यु सरकार का जन्म किसी उच्च कुल या कुलीन घराने में हुआ हो ऎसी बात नही, किसी निरे साधारण से परिवार में उसका जन्म हुआ यह भी कहना गलत होगा । पर हां, सरल सधारण से वातावरण में ही अभिमन्यु पला बढ़ा, यहां तक कि उसने कभी कोई चौका देने वाला कोई भी ऎसा काम नही किया जिसके द्वारा भूमिका बांधकर इस कहानी को आगे की ओर धकेला ज सकता ।

हां, एक बात अवश्य उसके पक्ष में यहां मै कह देना चाहता हूं, अभि अपने आप में दुनिया के बाकी लोगों से काफी भिन्न था, कुछ एक बातें उसके साथ ऎसी जुड़ीं थी कि हमें अपनी ओर बरबस खींचने को मजबूर कर देती थीं । मैं यह कहानी उसके जनम से लेकर मरण तक की गाथा के रूप में नही पेश करना चाहता । मैं यह भी नही चाहता कि सिर्फ अभि के व्यक्तित्व का वही हिस्सा यहां प्रस्तुत करूं जो समाज के उत्तरदायी प्राणियों को पसंद आ सके । मेरा मकसद कुछ भी छिपाने को मुझे बाध्य नही करता, साथ ही साथ यह भी बता दूं कि सब बताने लायक बातों को खास अंदाज़ में बयान कर सकूं, इसकी न तो कोई ट्रेनिंग मैनें ली है ना ही सफल कहानीकार होने का कोई दम भरने को मैं तैयार हूं । बस आप सबसे मुखातिब होकर जितना या जैसा बन पड़े कह सकूं उसमें ही अपने को भाग्यशाली समझूंगा, इतनी छोटी सी बात के लिये अपने आपको धन्य समझने का हक मुझे नही है, पर कहानीकार होने की संज्ञा से विभूषित होने की या किसी अन्य किस्म की कोई भी आकांक्षा न मेरे मन में विद्यमान है न होनी ही चाहिये।

चलिये, आभि से आपकी पहली मुलाकात करवा दी जाये –

अभिमन्यु अभी-अभी दफ्तर से अपने घर पहुंचा है, सर पर अधपके बाल है, आंखों के नीचे स्याह काले दाग, चेहरे से पचास की जगह पचपन के दिखने वाले को युवक तो नही कहा ज सकता। पूरे दिनभर कुछ भी खास नही कर पाने की अपनी हार के साथ कुछ ही देर पहले अभि-अभी अभि ने अपने घर में प्रवेश किया है । अभि, कुछ अनमना सा होकर सोच रहा है- प्रतिदिन कुछ नया कर पाने की उसकी लालसा, कुछ न कुछ अपनी तरफ से अपने आस-पास घट रहे घटनाक्रम में अपने को भी जोड़ने की जिज्ञासा, संसार के बस किसी भी एक प्राणी को प्रसन्न कर पाने की अभिलाषा, भागते हुये समय को थोड़ी देर रोककर अपने मन की भाषा में बांध पाने का उसका अपना सपना – वह किसी भी दिशा में कुछ भी कर पाने में अपने आपको असमर्थ पाकर निराश हताश सा लगभग धम्म से सोफ़े की कुर्सी पर बैठ जाता है – इस जीवन का एक और दिन यूं ही बेकार चला गया ।

अभिमन्यु सरकार एक सरकारी कर्मचारी है, अच्छे ओहदे पर न भी सही अच्छी तनख्वाह अवश्य ही पाता है, कम से कम अपनी आमदनी से वह अपने परिवार का भरण पोषण ठीक-ठाक ही कर रहा है । एक छोटा सा मकान कुछ दस एक साल पहले बना लिया था, एक थोड़ा जरा पहले से बड़ा मकान बुक कर रखा है, कलकत्ता जैसे महानगर में उसके पास एक मोटर-गाड़ी है, अगर नही है तो अपने सरकारी घर में एयर-कंडीशनर की सुविधा नही है। अन्य कुछ नही है तो जो दिन-भर काम कर सके ऎसा कोई नौकर उसके पास नही है, वैसे बहुत कुछ जरुरत की चीज़ें अभि के पास है भी और बहुत कुछ नही भी है । वैसे इन सब बातों का उसकी कहानी से विशेष सरोकार नही है ।

अभि सोचता बहुत है, पता नही क्यों उसके मन में एक धारणा बस गई है । वह सोचता रहता है कि कैसे आज़ादी के समय हुये बंटवारे को भुलाकर दोनो देशों को एक किया जा सके । वह सोचता है कैसे या किस प्रकार देश कि अधिकांश गरीब वर्ग को पढा-लिखा कर उनके जीवन में सुव्यस्था लाई जा सके । उसका बहुत मन है कि वह किसी दिन संयुक्त राष्ट्र संघ के किसी कार्यालय में जाकर अपनी धरती मां की सेवा कर सके । उसे इस बात का हमेशा मलाल रहता है कि उसके भरसक कोशिश करने पर भी कभी न कभी उससे कोई ना कोई भूल हो ही जाती है जिसके कारण अन्य दूसरे लोगों को कष्ट पहुंचता है । करना बहुत कुछ चाहता है मगर कर लगभग कुछ भी नही पाता ।

अभिमन्यु सरकार के जीवन की कुछ एक घटनायें ऎसी भ हैं जिन्हे लाख भुलाने पर भी वह उन्हे भूल नही पाता मसलन उसके दादा आलोक सरकार का मर्डर हुये अब पंद्रह एक साल गुजर चुकें है पर अभि को अभी तक यही लगता है कि जैसे यह कल की ही बात हो । आलोक दा से उसे ही नही वरन आलोक दा को भी उससे उतना ही प्यार था जितना दो सगे भाइयों में होता है या होना चाहिये अकसर होता है। अभि आज भी आलोक दा का पर्याय ढूंढने में लगा है, आप विश्वास त नही करेंगें पर यह तथ्य बात है कि फ़िल्म जगत के महान अधिनायक अमिताभ बच्चन को वह उन्ही के रूप में देखता है पर उनसे मिल नही सकता, अपने दिल की बात उनके ब्लाग पर लिख भर लेता है, भाईसाहब ने भी एकाध बार उसके लिखे को पढकर या बिना पढे जबाव भी दिया है, अभिमन्यु के लिये इतना ह काफी है, उसे इसी बात से संतोष मिल जाता है कि उसने अपने मन की बात कह तो दी - फिर अपनी कविताई में अभि यह क्या कहना चाह रहा है –

अनकही जो रह गईं है
कह नही पाता है मन
श्रम-परिश्रम घोर करके
लिख नही पाता ये तन
आज कैसे कह सकूंगा
कह न पाया जो कभी
लाख कोशिश कर चुका
मन बांध न पाया अभी ।

आज बस इताना ही इसके आगे की कहानी किसी अन्य दिन आप सबको सुनाउंगा । अब तक आप लोगों को इस बात का अनुमान तो शायद लग ही गया होगा कि अभिमन्यु कविताओं की दुनिया का बाशिंदा भी है ।

Love Affection and Respect
Abhaya Sharma

PS: This is indeed going to be a semi-fictional work and nothing beyond that..